रविवार, 29 मार्च 2015

दो शब्द.....आप सब को धन्यवाद

आप सब को धन्यवाद 

ईश्वर - मुझे मनुष्य जन्म देने के लिए। अन्यथा न ये मस्तिष्क होता, न मन और न विचार। और ये सब न होते तो मेरी लेखनी भी न होती। 


मेरे माता पिता -मुझे जन्म देकर अच्छा शिक्षण अच्छे संस्कार देने,मेरी सुसंस्कृत वातावरण में परवरिश करने, मुझे अपनी स्वतंत्र सोच बनाने और उसे बनाये रखने की प्रेरणा देने,साथ ही उसका समर्थन करने के लिए मैं आजीवन उनकी ऋणी रहूँगी।  


मेरे गुरुजन - विशेषकर आदरणीया श्रीमति सुनीता काले मेम, आदरणीय श्री तिवारी सर, 
श्रीमति ममताअग्रवाल मेम, श्रीमति आशा श्रीवास्तव मेम,श्रीमति रीना मेम और महर्षि वेद व्यास विद्या मंदिर के सभी माननीय गुरुजन। आप सही मायने में मेरे सच्चे गुरु हैं, जिन्होंने समय-समय पर मुझे सही ज्ञान देने के साथ-साथ मेरी प्रतिभा को तराशने,मुझे प्रोत्साहित करने का भी कार्य किया है। 

मेरे सभी मित्र एवं रिश्तेदार - जो ब्लॉग बनाने के पहले भी और अब भी मेरी कृतियाँ मेरे कहने पर झेलते हैं और प्रतिक्रियाएं भी देते रहते हैं। तहेदिल से आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद। 


गुरु द्रोणाचार्य -वे जिनके ब्लॉग, मैंने ब्लॉग बनाते हुए visit किये और जाना कि ब्लॉग कैसे बनाया जाये,कैसे हिंदी में लिखा जाए और क्या क्या ब्लॉग पर लिखा जा सकता है। आप सभी की जानकारी में न होते हुए भी सबके ब्लॉग से कुछ न कुछ सीख लिया है।इसीलिए आप हुए द्रोणाचार्य और मैं एकलव्य और गुरुदक्षिणा के रूप में ये दो ब्लॉग बनाये हैं। 

http://lekhaniblogdj.blogspot.in/
http://lekhaniblog.blogspot.in/
अब गुरुदक्षिणा आपकी रूचि की है या नहीं, ये तो आप पढ़कर ही बता पाएंगे।अपना अमूल्य समय देकर मार्गदर्शन अवश्य कीजियेगा। अब तक आपसे जो ज्ञान मिला उसके लिए आपको सधन्यवाद और आगे अब आप मुझे प्रत्यक्ष मार्गदर्शन देंगे। इस आशा में अग्रिम धन्यवाद।
 dj 

6 टिप्‍पणियां:

  1. Dhanyawad Hume dhanyawad dene k liye☺ par ye tera hunar hi he jo yaha tk le aya or age b ese hi unnati ki kamna krte he ...

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  2. Dhanyawad Hume dhanyawad dene k liye☺ par ye tera hunar hi he jo yaha tk le aya or age b ese hi unnati ki kamna krte he ...

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  3. एक लेखक का सबसे बडा गुण विनम्रता औऱ सम्वेदनशीलता है। ईश्वर को धन्यवाद कि दिव्या मे ये यथेष्ट मात्रा मे हैँ।

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  4. एक लेखक का सबसे बडा गुण विनम्रता औऱ सम्वेदनशीलता है। ईश्वर को धन्यवाद कि दिव्या मे ये यथेष्ट मात्रा मे हैँ।

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  5. किसी भी व्यक्ति में कोई भी गुण/संस्कार माता पिता से ही आता है ये सब आपके आशीर्वाद का ही परिणाम है गर्व है मुझे कि मैं आपकी बेटी हूँ

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