जीवन के रंग मौसम के संग
गर्मियों की चिलचिलाती धूप सा है जीवन!?
तो क्या...!??
अपनों के "प्रेम" रूपी रेत में ठंडक खोज लेना।
हाँsss...!
आँसू छिपाने वाले उस काले चश्में की ज़रूरत बहुत पड़ेगी यहाँ...
हो सके तो ज़िन्दगी के बाज़ार जाकर उसे भी खरीद लेना!
©®divyajoshi
2) 2) पतझड़ ( बदले रंग)

मेरे मन की शाख़ से अलग होते ही रंग बदल गया तुम्हारा...!?
हम साथ थे तो पतझड़ रास आता न था तुम्हें...
और अब...!?
पतझड़ में सूख़ कर गिरे पत्ते-से रंग में ही तो
समाया है न अक़्स तुम्हारा...!
©®divyajoshi
सर्द सफ़ेद वादियों में पकड़ा है न ये हाथ,
तो रिश्ता भी सफ़ेद ही रखना ।
3)सावन ( वो बारिशें)
5)बारिश और ख़्वाहिशें
बारिशें तो तन मन तरबतर कर ही देती हैं,
बारिशों में तो मयूर नाच ही उठते हैं।
मज़ा तो तब है,
जब तुम कुछ ऐसा कह दो कि...
बिन बारिश ही मन भीग जाए...
और मन मयूर ख़ुशी से नाच उठे...
©®divyajoshi
खूबसूरती से लिखे एहसास
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएं😊😊😊
जवाब देंहटाएंSpeechless